हिंदी दिवस पर निबंध , नारे और कवितायेँ ! - Hindi Diwas Essay , Slogans and Poems

हम सभी जानते हैं  कि हिंदी दिवस हमारे लिए विशेष महत्तव रखता है  । भारत के एक कोने से लेकर दूसरे कोने तक हिंदी समझी और बोली जाती है । हिंदी दिवस के शुभ अवसर पर सभी स्कूलों में अनेक कार्यकर्म होते है जैसे - निबंध लेखन , कवितायेँ , कहानी लेखन , नारे (Slogans ) तो आज हम आपके लिए कुछ ऐसे ही  हिंदी दिवस से सम्बंधित  निबंध और स्लोगन्स लेकर आएं है ।

मुझे विश्वास है कि आपको यह लेख पसंद आएंगे । आप इन्हे अपने विधायल के कार्यकर्मों में सुना सकते है । तो दोस्तों शुरू करते है   - हिंदी दिवस पर निबंध और Slogans ।

हिंदी दिवस पर निबंध , नारे और कवितायेँ   !  Hindi Diwas Essay, Slogans and Poem

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हिंदी दिवस पर निबंध  !! 

हिंदी भाषा को सम्मान देने के लिए प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को पुरे भारत में (विशेष रूप से विद्यालय और सरकारी संस्थानों में )  हिंदी दिवस के रूप  बड़े हर्ष उल्लास से मनाया जाता है । 14 सितम्बर 1949  हिंदी भाषा को भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार किया गया । और  हिंदी भाषा के महत्व को जानते हुए इस भाषा का जष्न मनाने के लिए  और हिंदी भाषा को सम्मान देने के लिए एक विशेष दिन चुना गया और वह दिन था 14 सितम्बर 1953 जो प्रत्येक वर्ष हिंदी दिवस के रूप में जाना जाने लगा । सबसे पहला हिंदी दिवस 14 सितम्बर 1953 को मनाया गया ।

हिंदुस्तान में हिंदी भाषा को आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार करने का कदम , एक सरहनिये कदम था और प्रत्येक वर्ष इस भाषा के सम्मान के लिए हिंदी दिवस का आयोजन कबिलिये तारीफ है । हिंदी दिवस एक अनुस्मारक है कि हम कहीं भी जाएं कहीं पर भी रहे पर हम अपने आदर्शो और अपनी संस्कृति को कभी नहीं भूलना चाहिए ।

हम हिंदी से है हिंदी हम से नहीं ! 

यह दिन हिंदी भाषा को बढ़ावा  देने और प्रसारित  करने  में एहम भूमिका निभाता है  । इस दिन को हिंदी कवितायेँ , कहानी और निबंध लेखन जैसे अनेक कार्येकर्मों को हिंदी दिवस के रूप में सभी स्कूलों और कॉलेजेस , कार्यालयों और संगठनों में बड़े उत्साह से मनाया जाता है । किसी भी देश कि पहचान उसकी मात्र - भाषा  से होती है । कोई भी देश अपनी मातृभाषा  से ही  विकास के पथ पर अग्रसर रहता है । 

विश्व के सभी देशो ने अपने ही देश की भाषा के माध्यम से अनेक अविष्कार किये ।

लेकिन अफ़सोस की बात है  कि आजादी के 5 दशक बीत जाने के बाद भी हिंदी भाषा एक सम्मान जनक स्थान प्राप्त नहीं कर सकी है  ।

और इसके सब बड़े दोषी हैं हम हिंदी भाषी लोग । हम बार-बार ये कहते रहते है कि हमें हिंदी नहीं आती और बहुत से माता पिता इस बात पर ज्यादा गर्व करते हैं उनका बेटा हिंदी न बोलकर अंग्रेजी बोलता है ।

अगर हम भारतियों  को हिंदी भाषा का ज्ञान नहीं होगा तो यह हमारे लिए बहुत शर्म की बात है ।

हमें अंग्रेजी सीखनी चहिये पर अंग्रेजी भाषा के चक्कर में हमें अपनी मातृभाषा हिंदी को नहीं भूलना चाहिए । 

अपनी भाषा से ही संस्कृति का ज्ञान होता है और इसी से एक व्यक्ति सामाजिक बनता है । अगर हम इसी तरह अपनी भाषा को नजर अंदाज करते रहे तो एक दिन आप आपको ही अपने देश में पराया महसूस करने लगेंगे ।

और अंत में - हमें हिंदी भाषा को अपनी राष्ट्र भाषा बनाने और देश को विकास के पथ पर अग्रसर करने के लिए हिंदी भाषा को अपनाना होगा । और यह तभी संभव होगा जब इस विकास की भागीदारी में  देश का प्रत्येक इंसान भागीदारी होगा 

 हिंदी दिवस से सम्बंधित नारे  !  Hindi Diwas Slogans


हिंदी जिसका नारा है ,

वह भारत हमको प्यारा है ! 

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जन-जन की आशा है हिंदी ,

भारत की भाषा है हिंदी !

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हिंदी का सम्मान करें ,

दुनिया भर में नाम करें !

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हिंदी देश की भावना है ,

आपको हिंदी दिवस की शुब्कामना है !

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हिन्द देश के वासी है हम , 

हिंदी हमारी पहचान है !!

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चलो मिलकर एकक मुहीम चलाएं ,

आज से ही हिंदी अपनाएं !!

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जन-जन से करो पुकार ,

हिंदी ने किया है हम सभी पर उपकार !!

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हिंदी बनती हमें महान ,

देश की यही है शान !!

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इज्जत वाली एक भाषा ,

हिंदी से मिलती यह आशा !!

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देश की यह शान है ;

हिंदी से हिंदुस्तान है !!

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देश की यह आशा ,

हिंदी है राष्ट्रभाषा !!

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सब भाषा का सार है ,

हिंदी को सबसे प्यार है !!

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जो नहीं करते हिंदी का सम्मान ,

हमेशा होता है उनका अपमान !!

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हिंदी मेरी आन हैं  ,

हिंदी में मेरे प्राण है !!

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हिंदी है तो आजादी है ,

हिंदी के बिना सब बर्बादी है !!

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हिंदी दिवस कवितायेँ !!  Hindi Diwas Poems


प्रेम पगी जुबां जैसे है 

धुप में हिंदी छाओं जैसी है 

आओ इससे प्यार करें 

हिंदी अपनी माँ जैसी है 


कर्णधरा पर अमृत बनकर 

बरसी हिंदी - बचपन में 

चुन-चुनकर जिह्वा पर रखी 

शब्द सुपारी - बचपन में 


पहला पुष्प  खिलाया मुख में 

कहलाकर माँ - माँ हिंदी में 

रिश्तों को परिभाषित करना 

सहेज सिखाया हिंदी ने 


क्या होती है शील सभ्यता 

होती है क्या संस्कारों की सुरभी

क्या है पवित्रता आचरण की 

क्या है  नरमी शिष्टाचार की  


अंक बिठाकर महतारी  ज्यों 

हमें सिखाया हिंदी ने 

धुल साफ़ कर मन  दरपन  की 

खुद से खुद को मिलवाया हिंदी ने 


घर में संत - दुआ जैसी है 

उर में प्राण - हवा जैसी है 

चंगाई में फूल हसीं-सी 

रोग में हिंदी दवा  जैसी  है 

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आज आपने क्या सीखा !

मुझे उम्मीद है कि  आपको मेरा यह लेख "हिंदी दिवस पर निबंध , नारे  और कवितायेँ   !!    " जरूर पसंद आया होगा । मेरी हमेशा से ही यह कोशिश रहती है कि  पढ़ने वालों को " हिंदी दिवस पर निबंध , नारे  और कवितायेँ   !  " के विषय में पूरी जानकारी प्राप्त हो । 

यदि आपको इस लेख  से सम्बन्धित कोई  शंका  है या आपको लगता है कि  इस लेख में कुछ सुधार होना चाहिए  तो Comment के जरिये हमें बता सकते है ।

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धन्यवाद्

My Hindi World (MHW).

सब कुछ हिंदी में ।

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